उत्तरकाशी में अधिशासी अभियंता की मनमानी : हैलीकॉप्टर से बचा रही कुर्सी
चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी: एक अधिशासी अभियंता की मनमानी का मामला सामने आया है, जो दफ्तर से नदारद रहने और झूठ बोलने के आरोपों से घिरे हुए हैं।
एक अधिशासी अभियंता का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे दफ्तर से नदारद रहने और झूठ बोलने का आरोप लगाया गया है।
सोमवार को जब संवाददाता ने अधिशासी अधिकारी के दफ्तर का दौरा किया, तो अन्य दिनों की भांति उनकी कुर्सी खाली मिली। जब फोन लगाया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया । कुछ समय बाद वापस कॉल आया जब पूछा कि आप कहां हैं
तो बताया कि जिलाधिकारी कार्यालय बैठक में हूं । लेकिन जब संवाददाता ने जिलाधिकारी कार्यालय में उनकी उपस्थिति की जांच की, तो पता चला कि उत्तरकशी नहीं थी बल्कि देहरादून में थीं।
इसके बाद अधिशासी अभियंता ने सरकार की उड़ान योजना का फायदा उठाकर महज नौ 45 मिनट में देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड से उत्तरकाशी के जोशियाडा हेलीपैड पहुंच गई
ठीक 2 : 32 पर अधिशासी अभियंता का फोन आता है कि मैं अॉफीस में हूं आजाओं । आप को बता दें कि अधिशासी अभियन्ता सोमवार को शनिवार को यह तक की शुक्रवार को भी उत्तरकाशी में उपस्थिति नहीं थी । संवाददाता के फोन के बाद अधिशासी अभियंता आनन -फानन में
देहरादून से उत्तरकाशी उड़ान योजना के तहत सीधे हैलीकॉप्टर से जोशियाड़ा हैली पैड में उतर कर , संवाददाता को फोन खटखटाया कि मैं अपने दफ्तर में हूं आजाओं
लेकिन जब संवाददाता ने जबाव दिया कि हैलीकॉप्टर पहुंच चुका है अभी – अभी तो अधिशासी अभियंता के पांव तले जमीन खिसकने लगी और कहने लगी कि मेरे कर्मचारी आपको मेरी पल-पल की खबरें दें रहे।
इतना ही नहीं अधिशासी अभियंता यहां नहीं रूकी जहां जहां तक राजनीतिक पहुंच थी वहां – वहां तक फोन घुमाने लगी कि मेरे कर्मचारी मुझे बदनाम कर रहे हैं।
मतलब दफ्तर में खुद नहीं बैठती ऊपर से झूठ का सहारा और जब झूठ पकड़ में आ गई तो पूरा ठीकरा अपने स्टाप पर फोड़ रही इस कहते हैं “उल्टा चौर कोतवाल को डांटे”
बहरहाल देखते हैं कि अधिशासी अभियंता का ये झूठ और राजनीतिक आकाओं के भरोसे कितने दिनों तक चलता है है ये तो एक ट्रेलर था पिक्चर अभी पूरी बाकी है।
अभी विभागीय योजनाओं का सिलेक्शन बाउंड की तहकीकात बाकी है। देखते है कितने चाहते व सुविधा शुल्क लेकर बाउंड हुए जांच का विषय है।
यूं तो उत्तरकशी जिला इंजीनियरों के लिए उत्तरकाशी जनपद हमेशा स्वर्ग रहा है । इस लिए उत्तरकाशी जिले में डॉक्टर और शिक्षक पहाड़ चढ़ते नहीं और इंजीनियर छोड़ते नहीं।
इससे पहले भी उत्तरकाशी में कई अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर चुके हैं। वर्ष 2005-06 में लोक आयुक्त ने 52 करोड़ की योजनाओं को फर्जी पाया था। इसके अलावा, धनारी क्षेत्र में पॉलिटेक्निक कॉलेज के नाम पर भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आया था। जहां निर्माण के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगी और तीन करोड़ का भुगतान कर दिया गया है।
वहीं मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता को कड़ी फटकार लगाई है।



