अंकिता भंडारी केस में बड़ा मोड़: कथित VIP पर FIR, CBI जांच की सिफारिश से बढ़ी हलचल
सियासी घमासान और जनता की निगाहें जांच पर
देहरादून: उत्तराखंड की बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मामले से जुड़े कथित वीआईपी के खिलाफ देहरादून के वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई पद्मभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की ओर से पुलिस महानिदेशक को दी गई शिकायत के आधार पर की गई है।
डॉ. जोशी ने शिकायत में आरोप लगाया था कि अंकिता भंडारी प्रकरण में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है, जिससे प्रकरण को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ मिल गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले अंकिता के माता-पिता सोनी देवी और वीरेंद्र भंडारी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सीबीआई जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने उनसे बातचीत के दौरान उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले में उचित निर्णय लेने का भरोसा दिलाया था। दो दिन बाद ही राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी।
2022 की हत्या, आजीवन कारावास की सजा, फिर क्यों उठा मामला?
सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में एसआईटी जांच के बाद न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
हालांकि, करीब 15 दिन पहले उर्मिला सनावर के एक ऑडियो क्लिप से सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बवंडर मचाने से मामला फिर से गरमा गया। वायरल ऑडियो में कुछ राजनीतिक और प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आने का दावा किया गया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई।
सियासी घमासान और जनता की निगाहें जांच पर
कथित वीआईपी पर मुकदमा दर्ज होने और सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद अब पूरे मामले पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर की नजरें टिकी हैं। पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों को उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच से मामले से जुड़े सभी पहलू सामने आ सकेंगे।सा.



