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उत्तरकाशी में वनाग्नि का खतरा बढ़ा, विभाग अलर्ट पर

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शीतकालीन सीजन में कम वर्षा- बर्फबारी से बढ़ रही वनाग्नि की घटनाएं :  डीपी बलूनी

चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी : उत्तरकाशी वन प्रभाग ने शीतकालीन सीजन में कम वर्षा- बर्फबारी और तापमान में वृद्धि के कारण वनाग्नि की घटनाओं की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नियमित गश्त कर रहे हैं और वनाग्नि की किसी भी सूचना पर तत्काल सूचना देने की अपील की गई है।
शुक्रवार को प्रभागीय वनाधिकारी उत्तरकाशी डीपी बलूनी ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि
शुक्रवार को वन प्रभाग के विभिन्न क्षेत्रों में वनाग्नि की पांच घटनाएं हुईं जिससे
करीब 04.25 हे0 आरक्षित एंव सिविल क्षेत्र प्रभावित हुआ
उन्होंने बताया कि वीरवार को एक राहगीर की मृत्यु सड़क पर वाहन चलाते समय पहाड़ी ऊपर से पत्थर गिरने के कारण हो गई।
जिस पर वन विभाग ने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।
डीएफओ ने आमजन से अपील की कि वे वन क्षेत्रों में आग के प्रति पूर्ण सावधानी बरतें किसी भी स्थान पर आग लगने की सूचना तुरंत नजदीकी वन चौकी या कू स्टेशन को दें।
डीएफओ ने बताया कि उत्तरकाशी वन प्रभाग स्थानीय जनता, ग्राम सभाओं तथा विभिन्न स्वयंसेवी समूहों एवं अन्य विभागों के सहयोग से वन संपदा के संरक्षण एवं वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध।

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उत्तरकाशी: वनाग्नि रोकथाम के लिए प्रशिक्षण और मॉक अभ्यास

उत्तरकाशी : जिले भर में वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को वनाग्नि रोकथाम और नियंत्रण के बारे में सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी गई है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य व प्रभागीय वनाधिकारी डी पी बलूनी के निर्देशों के क्रम में ग्रीष्मकाल के दौरान होने वाली वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर वनाग्नि रोकथाम संबंधी प्रशिक्षण, कार्यशाला एवं मॉक अभ्यास का आयोजन वन विभाग के अधिकारियों एवं कार्मिकों के विकासखण्ड परिसर भटवाड़ी में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कार्मिकों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों (गंगोत्री,टकनौर, बाड़ाहाट,भूमि संरक्षण वन प्रभाग, गंगोत्री नेशनल पार्क एवं वन निगम) को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारियां दी की गईं और मॉक अभ्यास भी कराया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन विभाग के 83 अधिकारियों और कर्मचारियों सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों ने भी भाग लिया।
इस दौरान फायर सर्विस के आरक्षी संजय कुमार ने घरेलू आग एवं वनाग्नि की घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वन संपदा को बचाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के प्रयोग की जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिनव ने वनाग्नि में घायल व्यक्तियों को दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण मे बन क्षेत्राधिकारी टकनौर, वन विभाग के वन बाडाहाट मुकेश रतूड़ी ने वनाग्नि की पीपीटी के माध्यम से वनाग्नि एवं वन संपदा की सुरक्षा तथा घायल व्यक्तियों के प्रबंधन में रिस्पांस टाइम को कम करने के उपायों के बारे में बताया गया। प्रशिक्षण मे रूप मोहन नौटियाल वन क्षेत्राधिकारी टकनौर, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री यशवन्त चौहान, वन क्षेत्राधिकारी इन्द्रावती महावीर सिंह खरोला उपस्थित थे।

 

🟢🟢🟢 मुख्य बिंदु:🟢🟢🟢🟢

वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा
– घायल व्यक्तियों के प्रबंधन और रेस्क्यू के तरीकों पर जानकारी
– वन संपदा की सुरक्षा और बचाव के लिए उपकरणों का उपयोग
– आपदा प्रबंधन और सैटेलाइट फोन की उपयोगिता के बारे में जानकारी

 

 

 

 

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