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धराली में नहीं मनाई दीपावली, गांव में छाया रहा सन्नाटा

आंसुओं के सहारे गुजारी दीपावली की रात धाराली आपदा पीड़ितों ने

धराली में नहीं मनाई दीपावली, गांव में छाया रहा सन्नाटा

चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी : दीपावली के पर्व  एक ओर पूरे देश- प्रदेश में भारी उत्साह पूर्वक  मनाया गया वहीं  उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित धराली और छोलमी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। पूरे गांव के लोगों ने दीपावली नहीं मनाया। दूर दूर तक कहीं पटाखे की आवाज भी सुनाई नहीं दी।
धराली आपदा में अपनों  और अपना रोजी-रोटी जरिए सब कुछ खो चुके लोगों में  गम साफ दिखाई दे रहा है।
कभी धराली दीपावली पर्व पर गंगा जी की कल- कल धारा , सघन सेब के बागवानों और देवदार वृक्षों के बीच रात को ऐसी चमकती जैसे मानों आसमान में तारे चमक रहे हैं, लेकिन इस दीपावली के दौरान धराली में सन्नाटा छाया रहा है।
पांच अगस्त को खीरगंगा में आये सैलाब ने हंसते खेलते धराली को महज 34 सेंकड में धराशाई कर दिया। यह लोगों के घर, होमस्टे , बहु मंजिलें होटल रेस्टोरेंट उनके आंखों के सामने तबाह हो गये।
धराली आपदा में करोड़ के होटल, होम स्टे, घर, सेब के बागवान खो चुके लोगों को अब अपना रोजी-रोटी शुरू करने का भैय सता रहा है।

जिनमें बड़े होटल व्यवसाई संजय पंवार, जयभगवान पंवार, दुर्गेश्वर  पंवार,सचेन्द्र पंवार, कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राकेश पंवार, भूपेंद्र पंवार आदि  लोगों की पूरे जीवन की कमाई और आजीविका  के साधन पल भर में नष्ट हुई हो गई।
वहीं मृतकों में मुकेश और उनकी धर्मपत्नी व बच्चे सहित धनेन्द्र पंवार,गौरव पंवार (गोली),शुभम पंवार, सुमित नेगी आदि ने 
इस आपदा में ” काल के गाल”   समाये लोगों की स्मृति में ग्रामीणों ने कैंडील जलाकर श्रद्धांजलि दी ।हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल  जिन लोगों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए थे, उन्हें पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए  सहायता के रूप में ₹5 लाख दिये। इसके अलावा, आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों को भी ₹5 लाख का मुआवज़ा 
 धराली में 98 परिवारों को राहत राशि के चेक वितरित किए।  आपदा प्रभावितों ने सरकार द्वारा सहायता राशि त्वरित मिलने पर धामी सरकार का धन्यवाद भी दिया था। होटल व्यवसाय संजय पंवार का कहना है कि हमारी दीपावली तो पांच अगस्त को हो गई । आपदा पीड़ितों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  केदारनाथ की तर्ज पर धराली का  पुनर्वास कर  विस्थापित करेंगे। तो निश्चित तौर पर आने वाले अगले वर्ष  हम लोग भी दीपावली मनाएंगे।

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