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चिन्यालीसौड़: वनाग्नि निपटने के दिऐ व्यावहारिक जानकारियां
उत्तरकाशी: गर्मी के मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन और वन महकमा अलर्ट मोड पर है। शनिवार को विकासखण्ड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कार्मिकों को वनाग्नि रोकथाम और आपदा प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई।
प्रभागीय वनाधिकारी उत्तरकाशी देवी प्रसाद बलूनी, प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी डैम वन प्रभाग ( द्वितीय) उत्तरकाशी सुश्री साक्षी रावत के प्रशिक्षण कार्यक्रम रूप-रेखा के तहत ग्रीष्मकाल के दौरान होने वाली वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु वनाग्नि रोकथाम संबंधी प्रशिक्षण , कार्यशाला एवं मॉक अभ्यास किया जा रहा है।
इस दौरान कन्हैया लाल बेलवाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी डैम वन प्रभाग (द्वितीय) उत्तरकाशी ने उत्तरकाशी वन प्रभाग के डुण्डा, धरासू रेंज, टिहरी डैम वन प्रभाग (द्वितीय) उत्तरकाशी के खुरमोला गाड़, दसकीगाड, नगुण गाड़, कमांद रेंज, भूमि संरक्षण वन प्रभाग की धनारीगाड रेंज, एवं वन निगम)को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारियां दी है।
प्रशिक्षण के जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, उत्तरकाशी के मास्टर ट्रेनर मस्तान भण्डारी ने आपदा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण उपकरण जैसे:- हेलमेट, रोप, जुमर, पुली, वायर लेडर, स्ट्रेक्चर, पी0 के0 बैग, तत्काल सम्पर्क सूत्र नम्बर-108, 112 आदि जानकारी तथा सैटेलाइट फोन की उपयोगिता एवं संचालन विधि के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
फायर सर्विस के आरक्षी दीपक रावत ने घरेलू आग एवं वनाग्नि की घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वन संपदा को बचाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के प्रयोग की जानकारी दी।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ रिशिता ने वनाग्नि में घायल व्यक्तियों को दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान वन विभाग के श्रीमती पूजा चौहान वन क्षेत्राधिकारी डुण्डा एवं जगमोहन सिंह गंगाड़ी वन क्षेत्राधिकारी धरासू ने वनाग्नि की पीपीटी के माध्यम से रोकथाम एवं वन संपदा की सुरक्षा तथा घायल व्यक्तियों के प्रबंधन में रिस्पांस टाइम को कम करने के उपायों के बारे में बताया गया।



