एक्सक्लूसिव : हाईकोर्ट से पुरोला प्रमुख निशिता को बड़ी राहत, सिविल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक
पुरोला पूर्व विधायक मालचंद के विरोधियों को लगा झटका।।
पुरोला/ उत्तरकाशी : मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी के पुरोला ब्लॉक प्रमुख श्रीमती निशिता शाह को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पुरोला सीवल कोर्ट में दायर चुनाव याचिका की आगे की कार्यवाही पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह याचिका “श्रीमती आंचल बनाम निशिता पंवार व अन्य” शीर्षक से दायर की गई थी, जिसमें उनके चुनाव को जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि निशिता शाह ने पहले अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लिया, जबकि चुनाव अनुसूचित जाति वर्ग से लड़ा। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जाति प्रमाण पत्र की वैधता तय करने का अधिकार केवल जाति सत्यापन समिति को है, न कि सिविल न्यायालय को।
हाईकोर्ट नैनीताल के न्यायमुर्ति आलोक वर्मा की अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में तर्कों को विचारणीय मानते हुए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की है। तब तक निचली अदालत जिला जज उत्तरकाशी की अदालत
में चल रही कार्यवाही स्थगित रहेगी।
में उनके खिलाफ प्रकरण की सुनवाई चल रही थी। अब हाई कोर्ट नैनीताल के ताजे आदेश से सिविल न्यायालय उत्तरकाशी में चल रहे सुनवाई पर रोक लगाई गई है। इससे पुरोला के पूर्व विधायक मालचंद के विरोधियों को कडा झटका लग गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किए थे वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार
वर्ष 2025 के पंचायत चुनाव में जाति प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी के आरोपों के चलते पांच माह पूर्व जिला न्यायालय के 02, फरवरी 2026 को आदेश पर पुरोला ब्लाक प्रमुख निशिता शाह के सीज हुए अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए बहाल कर दिए थे।
लंबे समय से चले आ रहे इस प्रकरण के कारण प्रखंड स्तर पर कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे, जो अब गति पकड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। फैसला सामने आते ही पूर्व विधायक मालचंद प्रमुख निशिता शाह के समर्थकों में खुशी माहौल है।
पूर्व विधायक मालचंद व उनकी ब्लाक प्रमुख बहू निशिता शाह,समर्थकों ने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए न्याय पालिका का आभार एवं विश्वास जताया था।
बता दें कि ब्लाक प्रमुख निशिता शाह पूर्व विधायक मालचंद की पुत्रवधू हैं, प्रतिपक्ष द्वारा निशिता पर अनुसूचित जन जाति जौनसार क्षेत्र से मायका होने तथा पहले जनजाति प्रमाण पत्र का उपयोग करने व शादी के बाद ब्लाक प्रमुख पद के लिए अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र का लाभ लेने के आरोप लगाये गए थे।



