माघ मेला की अंतिम गीत सांध्य रही हिमाचली नाटी किंग विक्की चौहान के नाम
देहरादून की मयूर झांकी देख भावविभोर हुए दर्शक
चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी: पौराणिक धार्मिक माघ मेले (बाड़ाहाट कू थोलू) की अंतिम सांस्कृतिक संध्या हिमाचली नाटी किंग विक्की चौहान के नाम रही। उन्होंने उन्हें अपने गीत सांध्य की शुरुआत छत्तर धारी मासू देवता के स्तुति से किया। उसके बाद झूमे,झूमके झूमके ….,ओ बटीण मेरे.. “किंदी चले बठीणों किंदी चले तू,एलपी गाड़ी, सही पकड़े हैं…, ये लगी नाटी…., डाली गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी। जिसे सुनकर मेला पंडाल में मेलार्थी देर रात तक खूब थिरके ।
माघ मेला मंच पर मंगलवार सांय की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, विशिष्ट अतिथि
मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोरी भट्ट, प्रमुख डुंडा राजदीप परमार , प्रमुख मोरी रणदेव राणा, डॉ स्वाराज विद्वान,
एवं जिपं अध्यक्ष रमेश चौहान ने किया। इसके बाद हिमाचल के प्रसिद्ध गायक विक्की चौहान ने अपने गीत चमा चामा देणू बठीणे, कनौ के झूमके, बालमा, छोटी-छोटी गाड़ी मां, बिडरू न मानी ऐ, छोरी आ जा तू शिमला बाजार, मेरू चले घुमदी,डाली झूमा, बबली घूमदी टाटा सूमो मां, छोरी आजा तू विसमेरी करों दी, एलपी गाड़ी डिस्को साडी, सही पकड़े हैं ये लगी नाटी् और झूमके झूमके ,”ये ना छोरो समझाइए पिछले बाटी सिटी न बजाओ गाना……
जैसे शानादार गीतों की प्रस्तुती दी। जिसमें सुनकर पंडाल में बैठे युवक एवं युवति तथा अन्य मेलार्थी अपने कदमों को नहीं रोक पाए और खूब झूम उठे ।
इससे पूर्व माघ मेला पंडाल में देहरादून से आये मयूर झांकी ग्रुप ने एक से एक बढ़कर झांकियों के करतबों को देखकर दशकों को भावविभोर कर दिया।
इस मौके पर प्रताप सिंह भंडारी, गणेश नौटियाल,
जिला पंचायत सदस्य दीपेन्द्र कोहली, कविता शाह, पवन दास, भरत सिंह बिष्ट, बिना चौहान, देवेन्द्र नाथ, रोहित जूडियाल,आदि मौजूद रहे है। मंच का संचालन शरत सिंह चौहान ने किया।



