Breaking
Mon. Jun 29th, 2026

…आखिर दयारा के ”गोई”  में उस रात क्या हुआ?

बबीता पांडेय की दयारा मिस्ट्री:
एक महीना की खोज में  लाखों खर्च , नतीजा शून्य  

चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी। दयारा बुग्याल की खूबसूरत वादियों में 29 मई की मध्य  रात्रि को रामनगर नैनीताल निवासी 24 वर्षीय
बबीता पांडे   रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी  सरकार ने जमीन से लेकर आसमान तक पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन
एक माह बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला है। 
उसकी अंतिम लोकेशन दयारा बुग्याल के बेस कैंप गोई से करीब 200 मीटर नीचे मिली थी। बबीता के लापता होने की सूचना पर जिला, पुलिस, आपदा प्रबंधन, एसडीआरएफ व वन विभाग ने सर्च आपरेशन शुरू किया था।
यह सर्च अभियान धरासू  – यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणधिन  सिल्क्यारा  टन में फंसे 42 श्रमीकों   के लिये 17 दिनों तक दिन- रात   चले अभियान के बाद  बाद  बबीता पांडेय का पहला सर्च  अभियान था जिसमें  एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, पुलिस, वन विभाग, राजस्व विभाग, निम (NIM), ड्रोन, खोजी कुत्ते और यूकेडा के हेलीकॉप्टर तक को खोज अभियान में लगाया गया। इस अभियान में लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है, लेकिन न बबीता पांडेय  मिली और न ही उसके लापता होने की गुत्थी सुलझ सकी। हालांकि बबीता पांडेय केस में पुलिस की जांच जारी है पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस की एक टीम दयारा के अलाव , ऋषिकेश , हरिद्वार , रामनगर, ऊधम सिंह नगर , समेत बबीता के फोन व दोस्तों की के फोन की सीडीआर का की जांच  कर रही ।
गौरतलब है कि बबीता 29 मई को अपने दो दोस्तों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। बताया गया कि रात करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने खाना पैक कराया और कैंप के बाहर गाने सुन रही थीं। अगली सुबह उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला, जबकि बैग, एटीएम कार्ड और अन्य सामान कैंप में ही मौजूद था। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल सका।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दोनों साथियों से पूछताछ की। ट्रेक परमिट में कथित अनियमितताओं की भी जांच हुई, लेकिन एक माह बाद भी कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया।
इस बीच बबीता की मां अंजू पांडे और भाई हर्षित पांडे ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए अपहरण की आशंका जताई है। उनका कहना है कि उत्तरकाशी प्रशासन ने पूरी ईमानदारी से प्रयास किए, लेकिन अब इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। पुलिस भी अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है और परिजनों को दोबारा उत्तरकाशी बुलाया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— आखिर दयारा बुग्याल की उस रात बबीता पांडे के साथ क्या हुआ? क्या यह हादसा था, अपहरण था या कोई ऐसा रहस्य, जिसका सच अभी भी पहाड़ों की खामोशी में दफन है? एक माह बाद भी इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।

::::::;;;;;;:;;;;;;;;;;;;;;;;;;:::;::;:::::::;;

भालुओं के ठीकानों  तक पहुंची सर्च टीम

बबीता पांडेय का लापता हुये एक महिना पूरा हो चुका हैं जिला प्रशासन ने सर्च अॉपरेशन    अभी बंद नहीं किया  अब जांच एजेंसियों ने खोज अभियान की दिशा बदलते हुए उन इलाकों पर फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां भालुओं की सक्रियता की संभावना जताई जा रही है। दयारा बुग्याल, नटीण के जंगलों और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में एक बार फिर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। वन विभाग के अनुसार इन इलाकों में समय-समय पर भालुओं की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है, जिसके आधार पर अब गुफाओं, घनी झाड़ियों और दुर्गम ढलानों की भी गहन जांच की जा रही है।
मामले में विभिन्न संभावनाओं पर समानांतर रूप से जांच जारी है। इनमें वन्यजीव हमला, दुर्घटना, रास्ता भटकना, प्राकृतिक आपदा या अन्य मानवीय कारण शामिल हैं। हालांकि, अब तक किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक कोई प्रत्यक्ष सुराग न मिलने पर पारंपरिक खोज तरीकों के साथ-साथ तकनीकी जांच भी बेहद जरूरी हो जाती है। इसमें डिजिटल फुटप्रिंट, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का विश्लेषण अहम भूमिका निभा सकता है।

::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

दयारा  से बबीता के रहस्यमय ढंग से लापता होने से उत्तरकाशी के सुरक्षित पर्यटन पर उठे सवाल

उत्तरकाशी। धार्मिक पर्यटन और साहसिक ट्रैकिंग के लिए विश्वभर में अपनी अलग पहचान बना चुका उत्तरकाशी जिला इन दिनों एक ऐसी घटना के कारण चर्चा में है, जिसने पर्यटन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से 29 मई को राजनगर निवासी 24 वर्षीय बबीता पांडेय के रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने के बाद एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
उत्तरकाशी अपने प्राकृतिक सौंदर्य, हिमालयी ट्रैक और मखमली बुग्यालों के कारण देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद रहा है। केदारकांठा, हरकीदून, दयारा बुग्याल, गरतांग गली, नेलांग घाटी, गोमुख, डोडीताल और सरूताल जैसे पर्यटन स्थलों पर हर वर्ष लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म ने भी जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
लेकिन दयारा बुग्याल से एक युवती के रहस्यमय ढंग से लापता होने की घटना ने पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। घटना के बाद पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों द्वारा व्यापक खोज अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। पुलिस ने युवती के साथ ट्रेक पर गए दो साथियों से भी पूछताछ की है और मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से जारी है।
इस घटना को राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रमुखता से प्रसारित किया गया है, जिससे देशभर में उत्तरकाशी के पर्यटन स्थलों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि मामले का जल्द खुलासा नहीं होता और युवती का कोई सुराग नहीं मिलता, तो इसका असर दयारा बुग्याल ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरकाशी के साहसिक पर्यटन की छवि पर पड़ सकता है।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय ट्रेकों पर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रैकिंग रजिस्ट्रेशन, जीपीएस मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित गाइड, संचार व्यवस्था और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम होगी और पर्यटकों का विश्वास भी बना रहेगा।
फिलहाल पूरे उत्तरकाशी सहित प्रदेशभर के लोग बबीता पांडेय के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं, यह घटना प्रशासन और पर्यटन विभाग के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है कि उत्तरकाशी की सुरक्षित पर्यटन छवि को बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!