एसआईटी रिपोर्ट के बाद शासन की मंजूरी; सरकारी धन के दुरुपयोग, कूटरचना और अभिलेखों में हेराफेरी के आरोप
पुरोला। नगर पंचायत पुरोला के पुराने निर्माण कार्यों से जुड़े कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद शासन से अनुमति मिलने पर पुलिस ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष हरिमोहन नेगी, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी शिवकुमार सिंह चौहान समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में पुलिस ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर अब संबंधित अभिलेखों और दस्तावेजों की जांच शुरू करने की तैयारी की है।
एसआईटी जांच के बाद शासन ने दी हरी झंडी, कई गंभीर धाराओं में केस
मामले की शुरुआत तत्कालीन सभासदों की शिकायतों से हुई थी। शिकायतकर्ताओं ने नगर पंचायत के निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, साक्ष्य मिटाने और षड्यंत्र के जरिए व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद शासन के निर्देश पर एसआईटी गठित कर जांच कराई गई। एसआईटी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी। अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने शनिवार को थाना पुरोला में मुकदमा दर्ज किया।
थानाध्यक्ष दीपक कठेत के अनुसार मुकदमे में धारा 420, 109, 106, 467, 468, 471, 477(ए), 120(बी) और 34 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब निर्माण कार्यों से संबंधित स्वीकृतियां, भुगतान, माप पुस्तिकाएं, बिल-वाउचर, अभिलेख और अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हरिमोहन नेगी का पलटवार- ‘दो साल से जांच के
नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा’
FIR दर्ज होने के बाद पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष हरिमोहन नेगी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत षड्यंत्र बताया है। उनका कहना है कि करीब दो वर्षों से जांच के नाम पर उन्हें लगातार बदनाम और प्रताड़ित किया जा रहा है। नेगी के मुताबिक अब तक हुई जांच में उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं, इसके बावजूद मुकदमा दर्ज कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें कहा कि पुरोला विधानसभा में सत्ता के नशे से चूर होकर चंद नेताओ द्वारा सर्वणों को निशाना बनायआ जा रहा है इसका जवाब यहां कि जनता आनेवाले 2027 के विधानसभा चुनाव में देंगे ।
FIR के बाद अब जांच की दिशा और एसआईटी रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर सबकी नजर है। नगर पंचायत के पुराने निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल में क्या सामने आता है, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।



