दुर्दशा का कारण है संस्कार विहीन समाज : डॉ दुर्गेशाचार्य महाराज
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भगवान श्रीकृष्ण के लीलाओं का वर्णन कर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
- चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी : संस्कार विहीन संतान ही आज हमारे समाज की दुर्दशा के कारण है। युवा आज नशे की लत के शिकार हो रहे हैं।
संस्कारवान व्यक्ति समाज के लिए सच्चे मार्गदर्शक बन सकते हैं। आज के युवाओं को ऐसे लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उक्त विचार श्रीविश्वनाथ मंदिर में भेटियारा गाजणा के नौटियाल परिवार ने अपने स्वर्गीय पिता के स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा
के पांचवें दिन की कथा में राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेशाचार्य महाराज
ने व्यक्त किए। महाराज ने बाबा विश्वनाथ की पवित्र भूमि को तीर्थ नगरी घोषित होने की आवश्यकता बताया है।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के कथा का वर्णन कर सब को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महाराज जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण ही मोक्ष का मार्ग है। कथा श्रवण से जहां भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की त्रिवेणी की अनुभूति होती है, वहीं मानव मात्र परमात्मा से एकाकार होने की दिशा में सहज चल पड़ता है।
बुधवार को श्री विश्वनाथ मंदिर में
भेटियारा गांव निवासी हाल उत्तरकाशी
स्व. गोपेश्वर नौटियाल जी के पुन्य स्मृति में
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोरम व्याख्यान सुनाकर लोगों को भरपूर आनंदित किया। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य भगवान के प्रति समर्पित हो जाता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कथा में श्री कृष्ण की बाल लीला, माखन चोरी, पूतना मोक्ष, काली निग्रह, चीरहरण व गोवर्धन पूजा की कथा सुनाकर लोगों को परम सुख प्राप्त कराया। उन्होंने पूतना मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि कंस द्वारा भेजी गई पूतना नाम की राक्षसी को भगवान श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते करते ही प्राण पखेरू हो गए और उसको मोक्ष दिया। कहा कि भगवान अपने ग्वाल बालों के साथ माखन चोरी करते, जिसकी शिकायत सुन सुनकर माता यशोदा उन्हें सजा देती थी किंतु हर बार वह कोई न कोई चमत्कार कर उन्हें आश्चर्यचकित करते रहते थे।
कथा पंडाल में गुरू चौंरगी, तामेश्वर महादेव, हरिमहाराज, भैरव देवता, हलवा देवता, नागराजा, आदि देवताओं डोलियां विराजमान है।इस मौके पर कथा आयोजक श्रीमती ऊषा नौटियाल देवी एवं उनके पुत्र विमलेश्वर नौटियाल और अभिषेक नौटियाल और किशोर नौटियाल ,बद्री मिश्रा, पवन थपलियाल ,जगदीश प्रसाद भट्ट, विमलेश्वर प्रसाद नौटियाल, अभिषेक नौटियाल, भगवती बिजल्वाण कृष्णा मिश्रा, भीम प्रसाद , मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वय किशोर भट्ट, काशी विश्वनाथ मंदिर के पूजारी अजेय पुरी, हरि सिंह राणा आदि मौजूद रहे है।



