बर्ड वाचिंग के लिए अच्छे संकेत : डीएफओ
चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी : जिले के अपर यमुना वन प्रभाग अंतर्गत पहली बार सिरकीर मालकोह पक्षी की तस्वीर कैद हुई है। प्रभागीय वनाधिकारी बड़कोट यमुना वन प्रभाग रविंद्र पंडित ने बताया है कि यह पक्षी यमुना वन प्रभाग में पहली बार नजर आई है यह बर्ड वाचिंग के लिए अच्छे संकेत है। उन्होंने बताया कि मेने वन कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि वन में गस्त के दौरान यदि कोई चिड़िया या वन्य जीव दिखाई देता है तो उसकी फोटोग्राफी अवश्य करें। उन्होंने कहा कि इस पक्षी का बसेरा मैदानी इलाकों में होता है।
। यह विशेष रूप से शुष्क झाड़ीदार वन और लगभग 3280 फीट की ऊंचाई से नीचे के खुले वनभूमि आवासों में मिलता है लेकिन बड़कोट में दिखना दुर्लभ और शोध का विषय है।
बता दें कि सिरकीर मालकोह पक्षी
एक बड़ा, भूरा-काला पक्षी है जो अपनी लंबी पूँछ, हुकदार लाल चोंच और आँखों के चारों ओर नीले पैच (कुछ प्रजातियों में) के लिए जाना जाता है। यह गैर-परजीवी कोयल है जो कीड़े-मकोड़े, छिपकलियाँ और छोटे जीवों को खाती है, और शुष्क वनों में घनी झाड़ियों में रहना पसंद करती है। यह धीमी, सीधी उड़ान भरती है और संकट में झाड़ियों में छिप जाती है, और इसे “कौवा तीतर” भी कहते हैं।
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उत्तराखंड में बसता है परिंदों का अद्भुत संसार:
दुनिया भर में पक्षियों की करीब 11000 प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें से भारत में करीब 1360 प्रजातियां रिकॉर्ड की गई हैं, जबकि उत्तराखंड में इनमें से 729 प्रजातियां चिन्हित की गई हैं। यानी देशभर में पाई जाने वाली कुल पक्षियों की प्रजातियों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा उत्तराखंड में मौजूद हैं, जो कि प्रदेश में पक्षियों के लिए बेहतर माहौल को जाहिर करती है। इस लिहाज से देश में उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां सैकड़ों पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की गई हैं।



