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Thu. Jan 15th, 2026

आखिर क्यों हिंसक हो रहे हैं भालू, तीन महीने में दर्जनों हमले

भालू के खौफ से  सहमे रहे लाटा गांव,वन विभाग ने पहुंचाया बच्चों को स्कूल   

चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी :  उत्तरकाशी जिले के गंगा और यमुना घाटी के इलाके में बीते महिनों से भालू हिंसक हो रहे हैं। गुरुवार रात्रि को और शुक्रवार सुबह लाटा  और कुमाल्डी गांव में भालू गांव में घुस गया  जिससे  लोगों ने पूरी रात  डर में गुजारा।
शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे  भटवाडी़ के राजकीय प्राथमिक विद्यालय लाटा में भालू देखा गया जिसकी सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग और शिक्षकों को दी है। भालू के आंतक से डरे सहमे कुमाल्डी से बच्चों ने स्कूल जाने से ही मना कर दिया। बाद में वन विभाग की टीम ने अपनी वाहन से बच्चों को स्कूली बच्चों पहुंचाया  है।
इधर  टकनौर क्षेत्र के रेंजर रूप मोहन नौटियाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह लाटा से सूचना मिली थी वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्कूली बच्चों को अपनी वाहन से स्कूल पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग भालू से सावधान रहने की अपील लोगों से की जा रही है। स्थानीय  वन कर्मियो को भी लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है। लोगों से लगातार अपील की जा रही है, जंगल में जाने के दौरान वे सावधान रहें।
इधर क्षेत्र पंचायत सदस्य लाटा आकाश नेगी ने बताया कि गुरुवार रात्रि में कुमाल्डी, लाटा, मनेरी में गांव की तरफ भालू देखा गया है उन्होंने बताया कि क्षेत्र में आज तक भालुओं के ना तो इतनी संख्या थी ना ही इतने हमले होते थे।
बता दें कि सितम्बर  से नवंबर के बीच मोरी और गंगा घाटी के अस्सी गंगा, टकनौर घाटी के विभिन्न इलाकों में भालुओं ने करीब एक दर्ज लोगों पर हमले किए हैं‌ । इस हमले में कुछ लोगों को मौत के घाट उतार दिया और कई लोग इस बुरी तरह से जख्मी हो गए हैं ।पिछले एक दशक में पहली बार भालू इतने हिंसक हुए हैं। आमतौर पर बरसात के दिनों में भालू हिंसक नजर आते हैं। लेकिन इस बार
एक सप्ताह में तीन चार हमले और गांव में भालू की चहलकदमी से लोग दहशत में है।
अभी अस्सी गंगा क्षेत्र की सेंकू गांव की महिला को भालू ने  हमला कर पूरा चेहरा चबा डाला था। इतना ही नहीं  गया , बैलों पर भी हमले की सूचना है। 
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    बात अपनी – अपनी

भालू के हमले कई कारणों से हो सकते हैं, जैसे कि जब भालू को अपने बच्चों, भोजन या क्षेत्र की रक्षा करने की आवश्यकता महसूस होती है। इसके अलावा, जब भालू डरा हुआ, तनावग्रस्त होता है, या इन दिनों जंगलों में भोजन कुछ है नहीं संसाधनों की कमी के कारण  भूखा और हताश होता है, तो भी वह हमला कर सकता है। 
रूप मोहन नौटियाल
रेंजर टकनौर, भटवाडी़।
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लाटा गांव से अभिभावकों का आज सुबह फोन आया था की स्कूल की तरफ भालू देखा गया है । बच्चों की सुरक्षा के मध्य नजर हमने वन विभाग और ग्रामीण की मदद से बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाया और स्कूल से वापस घर भी भेजवाया है।
संगीता जोशी
प्रधानाध्यापिका
राजकीय प्राथमिक विद्यालय लाटा भटवाडी़।

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उत्तरकाशी भालू के आंतक , एक दर्जन भेड़ बकरी उतारी मौत के घाट

उत्तरकाशी: जिले भर में भालू के आंतक से ग्रामीण दहशत में। एक बाद एक हमलों के खौफ से लोग सहमे है
गुरुवार रात्रि को अस्सी गंगा घाटी क्षेत्र के ग्राम भंकोली से लगभग 5 किलोमीटर पैदल दूर स्थान क्वारी नामे तोक में (जंगल)  सूरत सिंह  अपनी गौशाला (छान) में बकरियों बंद कर रात्रि विश्राम अपने घर भंकोली आ गये थे। शुक्रवार समय प्रातः करीबन 11 बजे  गौशाला (छान) पहुंचे तो भालू द्वारा गौशाला( छान) को तोड़कर भेड़ बकरियों पर हमला किया, जिसमे 8 भेड़ एवं 2 बकरी को भालू द्वार मारी गयी तथा 4 बकरियां घायल होने की सूचना हैं।
घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची है। उधर  राजस्व उप निरीक्षक समेत पशुचिकित्सा की टीम भी मौके पर पहुंच गई है।

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