आशा ममगाईं की गढ़वाली कथा संग्रह “कल्यो” का हुआ लोकार्पण
चिरंजीव सेमवाल
देहरादून: दिवंगत अंजलि देवी स्मृति सम्मान गढ़वाली साहित्य की ख्याति साहित्यकार भाषाविद बीना बेंजवाल को दिया गया।
देहरादून के कुकरेजा इंस्टीट्यूट गणेश विहार, अजबपुर खुर्द में
आयोजित समारोह के बतौर मुख्य अतिथि गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी,विशिष्ट अतिथि डॉ नीता कुकरेती , डॉ कुसुम भट्ट,दिनेश रावत , साहित्य कार दिनेश रावत, कैलाश ममगाईं ने
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।
बता दें कि सम्मान प्रत्येक वर्ष साहित्य,खेल,कला ,लोक संस्कृति और फिल्म अभिनय के क्षेत्र में दिया जा रहा है।
बीना बेंजवाल को गढ़वाली साहित्य में उत्कृष्ट कार्य के लिए गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगीके हाथों से दिया गया।
बता दें कि स्वर्गीय अंजलि देवी स्मृति सम्मान आशा ममगाईं ने अपनी दिवंगत बहन अंजलि देवी के नाम पर शुभारंभ किया ।
इस कार्यक्रम में आशा ममगाईं के गढ़वाली कथा संग्रह “कल्यो “और रजनी डुकलान के कविता संग्रह “एक नदी थमी सी “का भी लोकार्पण भी किया गया । “कल्यो संग्रह महिला सशक्तिकरण पर आधारित है।
उल्लेखनीय है कि गढ़वाली बोली की उभरती लेखिका श्रीमती आशा ममगाईं प्रसिद्ध आयकर अधिवक्ता विमल ममगाईं की धर्मपत्नी हैं । मूल रूप से ग्राम भटवाड़ा (खोला) की निवासी हैं। वे सुप्रसिद्ध समाजसेवी स्व. विद्या दत्त ममगाईं की पुत्रवधू हैं। मायके पक्ष से उनका संबंध ग्राम भिगुन, पट्टी थाती कठूड़ से है।
गढ़वाल की सांस्कृतिक परंपराओं में पली-बढ़ी आशा ममगाईं गढ़वाली बोली की संवेदनशील लेखिका हैं। उनका एक लघु शोध कार्य पूर्व में प्रकाशित हो चुका है। कथा-संग्रह ‘कल्यो’ के माध्यम से उन्होंने गढ़वाली समाज, लोकजीवन और संवेदनाओं को साहित्यिक अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है।
आयोजकों ने सभी साहित्य प्रेमियों एवं गढ़वाली भाषा-संस्कृति से जुड़े लोगों से कार्यक्रम में उपस्थित होने की अपील की है।
कार्यक्रम में”कल्यो “कथा संग्रह की समीक्षा करते हुए डॉ कुसुम भट्ट और ज्योत्स्ना जोशी ने सराहना की है
कार्यक्रम में कांता घिड़ियाल ,
मदन डुकलान ,कल्पना , मोनिका भंडारी डॉ अंजु सेमवाल,आंनदी ,कार्यक्रम संयोजन अशिता डोभाल
आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम संचालन डॉ. साधना जोशी और राघवेन्द्र उनियाल ने किया।



