उत्तरकाशी की तीनों विधानसभा सीटों पर टिकट की दौड़ तेज, एक अनार सौ बीमार जैसे हालात
चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन उत्तरकाशी जिले की तीनों विधानसभा सीटों—पुरोला, यमुनोत्री और गंगोत्री—में भाजपा के भीतर टिकट की राजनीति ने अभी से गर्माहट पकड़ ली है। हालात ऐसे हैं कि पार्टी के अंदर ही कई दावेदार मैदान में दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि समय रहते नेतृत्व ने संतुलन नहीं साधा तो विपक्ष से पहले पार्टी को अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।
पुरोला : पूर्व विधायकों की सक्रियता से बढ़ी हलचल
पुरोला विधानसभा में पूर्व विधायक मालचंद लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। वहीं पूर्व विधायक एवं दायित्वधारी राज्य मंत्री राजकुमार और पूर्व विधायक मालचंद की नजदीकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी है।
दोनों नेताओं की बढ़ती सक्रियता को 2027 के टिकट की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे मौजूदा विधायक को 2027 में कठिन चुनौती मिलने तय है। ऐसे में पुरोला में भाजपा के भीतर दो गुटों में शक्ति प्रदर्शन की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
यमुनोत्री : केदार रावत के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
यमुनोत्री विधानसभा में भाजपा के पूर्व विधायक केदार सिंह रावत के हालिया बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि विधानसभा में कुछ भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं चाहते कि पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीते। उनके इस बयान के बाद संगठन के भीतर कथित भीतरघात और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
यमुनोत्री सीट पर पूर्व विधायक केदार सिंह रावत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान तथा दायित्वधारी रामसुंदर नौटियाल को संभावित दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है। इससे टिकट की दौड़ और रोचक होती नजर आ रही है।
गंगोत्री : दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
गंगोत्री विधानसभा में भी भाजपा के कई वरिष्ठ चेहरे सक्रिय हैं। पूर्व विधायक विजयपाल सिंह सजवाण, मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, राज्य मंत्री प्रताप सिंह पंवार, डुंडा प्रमुख राजदीप परमार, मौजूदा विधायक तथा भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र सिंह चौहान का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में लिया जा रहा है।
हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष ने चुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीति में संभावनाओं के दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते। ऐसे में उनका नाम भी चर्चाओं में बना हुआ है।
दायित्व वितरण पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी
जिले के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि दायित्व वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में असंतोष बताया जा रहा है। पुरोला और यमुनोत्री क्षेत्र से कई नेताओं को संगठन और सरकार में जिम्मेदारियां मिलने के बावजूद गंगोत्री क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की बातें सामने आती रही हैं।
हालांकि सरकार ने प्रताप सिंह पंवार को दायित्व दिया है, लेकिन कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन के मूल कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिला। यह असंतोष अभी खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
2027 से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती
उत्तरकाशी जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के भीतर टिकट के कई दावेदार सक्रिय हैं। यदि टिकट वितरण के समय सभी पक्षों को साधने की रणनीति नहीं बनाई गई तो नाराजगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि संगठन के भीतर संतुलन बनाए रखना होगा।



