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Fri. Jan 23rd, 2026

रवांल्टी- गढ़वाली कवियों ने जमाया रंग, माघ मेला में गूंजी लोकभाषा

 

माघ मेले के पांचवें दिन कविताओं पर कभी लोट पोट तो कभी गंभीर हुए श्रोता

चिरंजीव सेमवाल 
उत्तरकाशी : माघ मेला (बाराहाट कु थौलू) के पांचवें दिन रामलीला मैदान में हुए रवांल्टी- गढ़वाली
कवि सम्मेलन में रवांल्टी- गढ़वाली, जौनसारी,
बोली के कवियों ने लोकभाषा, हास्य और व्यंग्य की छटा बिखेर दी। कार्यक्रम का संयोजन राघवेंद्र उनियाल एवं प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने किया।
कवियों ने एक के बाद एक रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। डॉ. माधव प्रसाद ने गंगा की स्वच्छता और समस्याओं को स्वर दिया, जबकि महावीर रवांल्टा, ने कविता से युवाओं में जोश भर दिया। वहीं उन्होंने आज-कल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए डिग्रियां खरीदने के प्रचलन पर कटाक्ष किया।
अनोज बनाली ने सामाजिक जागरूकता पर तीखा व्यंग्य करते हुए समाज के लिए शराब नशे पर खूब कटाच्छ किया किया और
प्रदीप रवांल्टा ने की हास्य कविता “मुबाईल” पर दर्शक ठहाकों से लोटपोट हो उठे। समापन में साहित्यकार दिनेश रावत ने समाज में एकता और संस्कृति संरक्षण का आह्वान किया।
कवि गोष्ठी में वीरेंद्र डंगवाल पार्थ, ने प्रेम पर खूब कविता सुनाई, वहीं जौनसार बावर क्षेत्र के नंदलाल भारती ने नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़े रखने का संदेश दिया।
वहीं मीना नेगी , नेहा सिलवाल, आनन्दी नौटियाल, गीता बहुगुणा, ध्यान सिंह रावत, राजेश जोशी,
नीरज नैथानी , कल्पना असवाल, मोनिका भंडारी, आदि
कवियों की प्रस्तुतियों पर खूब तालियां बजीं और सभी को कवियों जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान ने सम्मानित किया है।
मंच का संचालन डॉ.साधना जोशी ने किया ।

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