न परमिट, न बीमा, न प्रदूषण प्रमाणपत्र, दो साल से टैक्स भी जमा नहीं; सड़क सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
चिरंजीव सेमवाल
उत्तरकाशी। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर्षिल में टैक्सी चालक से कथित मारपीट के मामले की जांच के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जिस टैक्सी वाहन (यूके 10 टीए 0727) को लेकर पूरा विवाद हुआ, वह पिछले चार वर्षों से बिना फिटनेस के सड़क पर दौड़ रही थी। इतना ही नहीं, वाहन के पास न वैध परमिट था, न बीमा, न प्रदूषण प्रमाणपत्र और बताया जा रहा है कि दो वर्ष से अधिक समय से वाहन कर (टैक्स) भी जमा नहीं किया गया था।
इस खुलासे के बाद बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने लंबे समय से सभी जरूरी दस्तावेजों के बिना यह वाहन गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर कैसे संचालित होता रहा। यदि इस दौरान कोई दुर्घटना हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती।
इधर, विश्वनाथ जीप कमांडर, सूमो, मैक्स एवं टैम्पो ट्रैवलर चालक-मालिक कल्याण समिति के अध्यक्ष बबलू ने कहा कि यूनियन के संज्ञान में यह बात नहीं थी कि संबंधित वाहन बिना फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र के संचालित हो रहा है।
:::::::: क्या है पूरा मामला:::;;;;;;;
टैक्सी एसोसिएशन के अनुसार, बीते रविवार को चालक अरविंद सिंह चौहान भटवाड़ी टैक्सी स्टैंड से सवारियां लेकर गंगोत्री जा रहे थे। आरोप है कि हर्षिल में पुलिस चेकिंग के दौरान चालक ने वाहन नहीं रोका, जिसके बाद पुलिस ने वाहन रोककर चालक से दस्तावेज मांगे। इसी दौरान विवाद हो गया।
चालक का आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ मारपीट की और उसे वाहन में बैठाकर थाने ले जाने लगी। आरोप है कि इस दौरान उसे वाहन से कूदने के लिए उकसाया गया। चालक के अनुसार वह वाहन से कूद गया और नदी में बहने से बाल-बाल बचा। बाद में पुलिस और पीआरडी के जवानों ने उसे बाहर निकालकर हर्षिल अस्पताल पहुंचाया।
एसोसिएशन का आरोप है कि घायल चालक से मिलने पहुंचे दूसरे चालक धर्मेंद्र राणा के साथ भी पुलिस ने अभद्रता की तथा उसके मोबाइल से वीडियो हटवा दिया। बाद में घायल चालक को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
घटना के विरोध में भटवाड़ी टैक्सी यूनियन ने 21 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। मंगलवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, जनप्रतिनिधियों और टैक्सी यूनियन पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में जांच अवधि तक आरोपी पुलिसकर्मी के तत्काल स्थानांतरण का निर्णय लिया गया। इसके बाद टैक्सी यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी।
अब इस पूरे प्रकरण में वाहन के दस्तावेजों में सामने आई गंभीर अनियमितताओं ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। वहीं, बिना आवश्यक दस्तावेजों के वर्षों तक वाहन संचालन को लेकर परिवहन व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।



