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मां गंगा के मायके मुखवा गांव ने फिर किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार

मुखवा गांव से पीएम मोदी ने किया था “घाम तापो योजना” का ऐलान   

6 मार्च को प्रधानमंत्री ने  मुखवा गांव से शीतकालीन यात्रा के किया था शुभारंभ

चिरंजीव सेमवाल

उत्तरकाशी: मां गंगा जी का शीतकालीन प्रवास मुखवा गांव में जांगला तक सड़क नहीं तो वोट नहीं से एक पुनः पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिया  है।
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रदेश भर में चल रहे त्रिस्तरीय पंचायत उप चुनाव में मुखवा गांव के ग्रामीणों ने एकाता का परिचय देते हुए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन तक एक भी नामांकन नहीं किया जिससे एक बार एक पुनः पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिया है। गांव के रावल राजेश सेमवाल, शैलेश समवाल  ने बताया कि ग्रामीणों ने एक पुनः पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिया है।
गौरतलब है कि 6 मार्च 2025 को इसी  गांव से पीएम मोदी ने “घाम तापो योजना” की घोषणा की थी।
      उत्तरकाशी जिले का मुखवा गांव,  गंगा का शीतकालीन पूजा स्थल होने के साथ ही गंगा का मायका भी माना जाता है, उस गांव के लोगों ने एक बार फिर पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिया है । उप चुनाव में ना ग्राम प्रधान के लिए किसी ने नामांकन किया ना क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए।
      गांव वालों की एक ही मांग है कि मुखवा से जांगला तक सड़क का निर्माण किया जाए। इसी गांव के लोगों ने अगस्त महीने में धराली गांव में आई भीषण आपदा के वीडियो बनाए थे। मुखवा गांव धराली के ठीक सामने गंगा के दूसरी ओर है। यह एक सीमांत गांव है और उत्तरकाशी से करीब 80 किलोमीटर आगे गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट है। दिलचस्प बात यह भी है कि यह वही गांव है, जहां
यह एक जुटता का प्रशंसनीय उदाहरण है। बिना किसी को कुछ कहे अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए अपनी आवाज को सरकारों तक पहुंचाना।

बता दें कि उत्तरकाशी मां गंगा के मायके मुखवा में मुखवा -जांगला मोटर मार्ग निर्माण की मांग को लेकर गंगोत्री मंदिर समिति एवं गंगा पुरोहित सभा ने  पंचायत चुनाव के दौरान जुलाई माह में एक बैठक की थी।  बैठक में मुखवा-जांगला मोटर मार्ग संघर्ष समिति का गठन किया गया था। ग्रामीणों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे भी लगाए थे । ग्रामीणों का कहना है कि मुखवा जांगला मोटर मार्ग 1983 में स्वीकृत हुआ था, लेकिन चार  दशक बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है इसलिए त्रिस्तरीय पंचायत सहित तमाम चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया ।

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