शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को दिए सुधारों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश
– तीन माह में पूरे होंगे मॉडल डायट के निर्माण कार्य
देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। अब प्रदेश के सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में शिक्षक प्रशिक्षण का स्वरूप पूरी तरह बदलेगा। पारंपरिक प्रशिक्षण की जगह नवाचार, आधुनिक शिक्षण तकनीकों, मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा और सोशल-इमोशनल लर्निंग (SEL) जैसे विषयों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य शिक्षकों को समय की जरूरत के अनुरूप दक्ष बनाकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को गति देना है।
विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय स्थित समग्र शिक्षा सभागार में आयोजित एससीईआरटी एवं डायट समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानते हुए उन्हें व्यावहारिक, तकनीक आधारित और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों और आधुनिक तकनीक से लैस करना बेहद जरूरी है, क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव प्रशिक्षित शिक्षक ही रखते हैं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, नैतिक मूल्यों और सोशल-इमोशनल लर्निंग को भी प्रमुखता दी जाएगी। साथ ही शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे विद्यार्थियों में तनाव, व्यवहार संबंधी बदलाव और अन्य मानसिक चुनौतियों की समय रहते पहचान कर उनका उचित मार्गदर्शन कर सकें।
बैठक में डायटों को शैक्षणिक उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित करने की दिशा में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए। इसके तहत अलग-अलग डायटों को सामाजिक अध्ययन, अंग्रेजी, विज्ञान, मनोविज्ञान, शैक्षिक तकनीकी सहित विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे प्रदेश में विषयवार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार हो सके।
डॉ. रावत ने मॉडल डायट निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2025-26 में स्वीकृत सभी निर्माण कार्य अगले तीन माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बजट का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए और विकास कार्यों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षक प्रशिक्षण को समाज से जोड़ने के लिए शिक्षा मंत्री ने एक नई पहल का भी सुझाव दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पद्मश्री सम्मानित व्यक्तियों, साहित्यकारों, लेखकों, अभिभावकों और ग्राम प्रधानों को भी शामिल किया जाए, ताकि शिक्षकों को समाज के विविध अनुभवों से सीखने का अवसर मिल सके।
बैठक में विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक आकांक्षा कोण्डे, एससीईआरटी निदेशक वंदना गब्र्याल, माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी, प्राथमिक शिक्षा निदेशक के.एस. रावत, अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी, उप निदेशक जे.पी. काला सहित प्रदेशभर के डायट प्राचार्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।



